अपना जिलाकवर्धा

20 – 25 साल की सेवा के बाद भी सैकड़ों शिक्षकों की सेवापुस्तिका का ऑडिट नहीं हुआ

कवर्धा – बीस-पच्चीस साल की सेवा के बाद भी जिले में कार्यरत सैकड़ों शिक्षक संवर्ग की सेवापुस्तिका का स्थानीय संपरीक्षक तथा कोष एवं लेखा से आज पर्यन्त तक ऑडिट नहीं कराया गया है। इसी तारतम्य में छ्ग टीचर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाध्यक्ष डॉ. रमेश कुमार चन्द्रवंशी के नेतृत्व में जिला शिक्षा अधिकारी एफ. आर. वर्मा से मुलाकात कर सेवापुस्तिका व सीजीपीएफ पासबुक का अद्यतन संधारण पश्चात ऑडिट कराने की मांग रखा। चर्चा के दौरान एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने बताया कि शिक्षाकर्मियों की नियुक्ति पंचायत विभाग के तहत सन 1998 से प्रारम्भ हुआ है, तत्पश्चात सन 2018 में स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षक एल. बी. संवर्ग के पद पर संविलियन कर शासकीयकरण किया गया। नियमों के अनुसार जब भी वेतन का निर्धारण होता है, उसके बाद सेवापुस्तिका का ऑडिट कराया जाना आवश्यक है। शिक्षाकर्मियों की पंचायत व नगरीय निकाय में सेवा सन 1998 से 2018 तक बीस वर्ष रहा, जिसके ऑडिट के लिए निर्धारित कार्यालय स्थानीय संपरीक्षक राजनांदगांव है। शिक्षाकर्मियों का 1998 के बाद सन 2003, 2007 एवं 2013 में वेतन निर्धारण तथा सन 2018 में पंचायत से शिक्षा विभाग में संविलियन के बाद भी वेतन निर्धारण हुआ। नियमों के अनुसार इन चारों अवसरों पर स्थानीय संपरीक्षक राजनंदगांव से सत्यापन कराया जाना था, लेकिन सैकड़ों शिक्षकों की सेवापुस्तिका का ऑडिट नहीं कराया गया। स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन के बाद निर्धारित वेतनमान का कोष एवं लेखा दुर्ग से ऑडिट कराया जाना था, लेकिन इसे भी नहीं किया गया। डीईओ ने इसे गंभीरता से लेते हुए जिले के समस्त बीईओ व डीडीओ प्राचार्य के नाम तत्काल पत्र जारी कर सेवापुस्तिका का सत्यापन कराने का निर्देश दिया है। प्रतिनिधिमंडल में प्रमुख रूप से एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष डॉ. रमेश कुमार चन्द्रवंशी, आसकरण धुर्वे, रविन्द्र चन्द्रवंशी, केशलाल साहू, वकील बेग मिर्जा, बलदाऊ चन्द्राकर, गोकुल जायसवाल, उमेश चन्द्रवंशी, दिलीप धुर्वे, राजकिरण चन्द्रवंशी, रंगलाल बारले, जयप्रकाश चन्द्रवंशी, चतुर मेरावी, विनोद राजपूत, देवेश वैष्णव, संजू वर्मा, नरेंद्र चंद्रोल, श्रीराम साहू, माधवेश केशरी, भूपति यादव, गैंदराम कुर्रे, रामसिंह साहू, पंचू धुर्वे, छबिलाल निर्मलकर, भागीरथी चन्द्राकर, राजेन्द्र तलवरे, संजय हठीले, रामसिंह धुर्वे, राजेन्द्र निर्मलकर, गोपी साहू, हर्षन जायसवाल, अतर मोहम्मद सिद्दीकी आदि शामिल रहे।

 

ऑडिट के बाद ही वेतन निर्धारण मान्य

एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष डॉ. रमेश कुमार चन्द्रवंशी ने बताया कि शिक्षकों का कोई भी वेतन निर्धारण तभी सही माना जाता है, जब उसे स्थानीय संपरीक्षक या कोष एवं लेखा से ऑडिट करा लिया जाता है। बगैर ऑडिट के कई बार अधिक वेतन निर्धारण से रिकव्हरी तथा कम वेतन निर्धारण से एरियर्स की स्थिति निर्मित होता है।

 

ऑडिट कराने की जिम्मेदारी डीडीओ का

शिक्षकों के सेवापुस्तिका का वेतन निर्धारण के बाद ऑडिट कराने की जिम्मेदारी डीडीओ का होता है, जिसके पास सेवापुस्तिका रखा जाता है। प्राथमिक व मिडिल स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों का डीडीओ विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी तथा हाई व हायर सेकेंडरी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों का डीडीओ प्राचार्य है।

 

बीईओ में ऑडिट की स्थिति खराब

जिले के प्राचार्य डीडीओ द्वारा ज्यादातर शिक्षकों की सेवापुस्तिका का ऑडिट करा लिया गया है, लेकिन बीईओ कार्यालय में ऑडिट की स्थिति खराब है, यहाँ प्राइमरी व मिडिल के ज्यादातर शिक्षकों की सेवापुस्तिका का स्थानीय संपरीक्षक तथा कोष एवं लेखा से ऑडिट नहीं कराया गया है। सन 1998 से लेकर 2026 तक ब्लाकों में अलग-अलग विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यरत रहे, लेकिन ऑडिट कराने के मामले में किसी ने गंभीरता नहीं दिखाया। इस विषय को लेकर टीचर्स एसोसिएशन के प्रयास से समय-समय पर डीईओ कार्यालय से पत्र जारी कराने पर बीईओ कार्यालयों द्वारा कुछ शिक्षकों का सेवापुस्तिका सत्यापन कराने के बाद फिर पुराने ढर्रे पर आ गए।

 

आखिर सेवापुस्तिका ऑडिट कार्यालय तक क्यों नहीं पहुंचा ?

अब सवाल उठना स्वाभाविक है कि सेवापुस्तिका के ऑडिट के महत्व को जानने के बाद भी पच्चीस साल में सेवापुस्तिका 120 किलोमीटर दूर स्थित ऑडिट कार्यालय तक क्यों नहीं पहुंचा, इसके लिए कौन जिम्मेदार है? एसोसिएशन ने पहले खेप में जिले के प्रत्येक ब्लॉक से सौ-सौ शिक्षकों की सेवापुस्तिका को ऑडिट कार्यालय पहुंचाने की मांग रखा है, जिसपर डीईओ ने सहमति दिया है।

बोर्ड परिणाम के आधार पर कार्यवाही के बजाय सुधारात्मक उपाय की मांग

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा दसवीं व बारहवीं के मुख्य परीक्षा परिणाम को लेजर हाई व हायर सेकेंडरी स्कूलों के प्राचार्य के नाम स्पष्टीकरण पत्र जारी किया गया है। इस विषय पर भी टीचर्स एसोसिएशन ने डीईओ को ज्ञापन सौंपकर प्राचार्य व शिक्षकों के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही के बजाय सुधारात्मक उपाय करने की मांग रखा है। एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष डॉ. रमेश कुमार चन्द्रवंशी ने कहा कि परीक्षा परिणाम केवल प्राचार्य के नेतृत्व या शिक्षकों के अध्यापन पर ही निर्भर नहीं होता है, इसे प्रभावित करने वाले कई कारक होते हैं। अतः शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार हेतु सुधारात्मक उपाय उचित है। डीईओ ने आश्वस्त किया है कि किसी के विरुद्ध कार्यवाही के बजाय कमियों का चिन्हांकन कर आगामी सत्र में सुधार हेतु टीम भावना से कार्य किया जाऐ.

Paras Sharma

पारस शर्मा, संपादक , मोबाइल - +91 9993390279 , ईमेल - kawardhatimescg@gmail.com

Paras Sharma

पारस शर्मा, संपादक , मोबाइल - +91 9993390279 , ईमेल - kawardhatimescg@gmail.com

Related Articles

Check Also
Close
Back to top button
error: Content is protected !!