
कवर्धा – जिले के प्रसिद्ध भोरमदेव महोत्सव के इस वर्ष प्रचार-प्रसार में कमी के कारण इस वर्ष श्रद्धालुओं और छोटे दुकानदारों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
आम तौर पर यह महोत्सव भोरमदेव मंदिर परिसर में बड़े धूमधाम से आयोजित होता है, जिसमें दूर-दूर से लोग आते हैं और स्थानीय व्यापारियों को भी अच्छी आमदनी होती है। लेकिन पर्याप्त जानकारी और प्रचार के अभाव में इस बार लोगों को कार्यक्रम की तिथि, आयोजन और व्यवस्थाओं को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है।
इस स्थिति का सबसे ज्यादा असर छोटे दुकानदारों पर पड़ रहा है, जो हर साल इस मेले में अपनी दुकान लगाकर अपनी आय का बड़ा हिस्सा कमाते हैं। अनिश्चितता के कारण वे यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि दुकान लगाएं या नहीं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है।
वहीं श्रद्धालु भी भ्रमित हैं कि महोत्सव कब और किस स्तर पर आयोजित होगा, जिससे संभावित भीड़ भी कम हो सकती है।
प्रशासन द्वारा समय पर आधिकारिक घोषणा नहीं किया गया।
सोशल मीडिया, पोस्टर, और स्थानीय मीडिया के माध्यम से प्रचार नहीं हुआ।
पहले गांव-गांव में सरपंच व सचिव के माध्यम से सूचना प्रसार होता था।
आयोजन की स्पष्ट रूपरेखा जारी नहीं करना
यदि समय रहते सही प्रचार-प्रसार किया जाता, तो भोरमदेव महोत्सव फिर से पहले की तरह सफल और जनभागीदारी वाला आयोजन बन सकता है।
आमंत्रण पत्र धुंधली होने के कारण श्रद्धालुओं असमंजस –
जिले के प्रसिद्ध भोरमदेव महोत्सव के आयोजन से पहले ही आमंत्रण कार्ड की छपाई को लेकर अव्यवस्था सामने आई है। इस वर्ष छपवाए गए आमंत्रण पत्रों में जानकारी अस्पष्ट और धुंधली होने के कारण श्रद्धालुओं एवं आम नागरिकों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
बताया जा रहा है कि कार्ड में कार्यक्रम की तिथि, समय और स्थान जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां साफ तौर पर पढ़ी नहीं जा रही हैं। कई जगह अक्षर धुंधले हैं तो कहीं प्रिंटिंग की त्रुटियों के कारण शब्द समझ पाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को सही जानकारी नहीं मिल पा रही है।
स्थानीय व्यापारियों और छोटे दुकानदारों ने भी इस समस्या को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि महोत्सव के प्रचार-प्रसार में आमंत्रण पत्र की अहम भूमिका होती है, लेकिन इस बार खराब छपाई के कारण लोगों तक सही संदेश नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे भीड़ पर भी असर पड़ सकता है।




