कवर्धा। जैन धर्म के वरिष्ठ संत मुनि श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के साथ कुल 23 जैन साधु पंडरिया नगर पहुंचे। उनके पंडरिया आगमन पर जैन समाज द्वारा श्रद्धा एवं भक्ति के साथ स्वागत किया गया।
नगर में साधु-संतों के आगमन से धार्मिक वातावरण बना हुआ है। इस अवसर पर प्रवचन, धर्मसभा एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग ले रहे हैं।
मुनि श्री विशुद्ध सागर जी ने अपने प्रवचन में अहिंसा, संयम और आत्मशुद्धि के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। साधु-संतों के सान्निध्य से नगर में शांति और धर्ममय वातावरण व्याप्त है।
“सभी जीव भगवान हैं, हम मनुष्य भी भगवान हो सकते हैं” — विशुद्ध सागर मुनि
पंडरिया के जैन भवन में श्रद्धालुओं को को संबोधित करते हुए मुनि श्री विशुद्ध सागर जी ने कहा कि “इस सृष्टि में प्रत्येक जीव में ईश्वरत्व का अंश है। यदि मनुष्य अपने आचरण, संयम और आत्मशुद्धि के मार्ग पर चले तो वह भी भगवान बन सकता है।”
उन्होंने अहिंसा, करुणा और आत्मसंयम को जीवन का मूल बताया तथा कहा कि मानव जीवन का उद्देश्य आत्मोन्नति और मोक्ष की ओर अग्रसर होना है। मुनि श्री के इस संदेश से श्रद्धालुओं में आध्यात्मिक चेतना का संचार हुआ।




