
जब सेटअप परिवर्तन नहीं, स्कूल बंद नहीं तो पद गए कहाँ
कवर्धा – प्रदेश के साथ जिले में भी शिक्षकों के ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया चलाया गया। इस त्रुटिपूर्ण युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया का शिक्षक संगठनों द्वारा प्रदेश, जिला व ब्लॉक स्तर में चौतरफा विरोध किया गया। शासन प्रशासन ने जोर-शोर से बताया कि प्रदेश व जिला में न तो किसी स्कूल को बंद किया जा रहा है और न ही सेटअप 2008 में कोई बदलाव किया गया है। विधानसभा में एक प्रश्न के जवाब में भी फिर से यही बात दोहराया गया है। इस पर छ्ग टीचर्स एसोसिएशन ने सवाल किया है कि शासन प्रशासन के अनुसार जब जिले में कोई स्कूल बंद नहीं किया गया है और सेटअप में भी कोई बदलाव नहीं हुआ है तो फिर केवल 50 दिन में जिले के 200 सहायक शिक्षकों के पद कहाँ गायब हो गए। एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष डॉ. रमेश कुमार चन्द्रवंशी ने बताया कि लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा दिए जानकारी के अनुसार 30 अप्रैल 2025 को जिले के प्राथमिक शालाओं में सहायक शिक्षक के 432 पद रिक्त थे जो 30 जून 2025 की स्थिति में घटकर रिक पद केवल 232 ही रह गया है। इस अवधि में न तो सहायक शिक्षकों की भर्ती हुआ है और न ही अन्य जिले से कोई सहायक शिक्षक आए हैं, तो फिर सहायक शिक्षकों के 200 पद कहाँ गायब हो गए। वास्तविकता कुछ और ही है। दरअसल युक्तियुक्तकरण के नाम से छ्ग शासन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी सेटअप 2008 का पालन नहीं किया गया है। इस सेटअप के अनुसार प्रत्येक प्राथमिक शालाओं में एक प्रधान पाठक व दो सहायक शिक्षक का पद स्वीकृत है, लेकिन युक्तियुक्तकरण में प्रत्येक प्राथमिक शाला में सहायक शिक्षक के एक पद कम कर दिया गया है। सवाल यही है कि शासन प्रशासन प्रदेश के प्रत्येक प्राथमिक व मिडिल स्कूल से एक-एक शिक्षकों के पद घटाने की वास्तविकता को स्वीकार करने से क्यों डर रहा है? इसी प्रकार इस त्रुटिपूर्ण युक्तियुक्तकरण से जिले के 335 शालाओं का अस्तित्व ही समाप्त कर दिया गया है। एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष डॉ. रमेश कुमार चन्द्रवंशी, आसकरण धुर्वे, उग्रसेन चन्द्रवंशी, हेमलता शर्मा, केशलाल साहू, वकील बेग मिर्जा, गोकुल जायसवाल, बलदाऊ चन्द्राकर आदि पदाधिकारियों ने शासन प्रशासन से त्रुटिपूर्ण युक्तियुक्तकरण को तत्काल निरस्त कर सेटअप 2008 के अनुसार शिक्षकों का पदांकन करने की मांग दोहराया है।




